Tuesday, July 28, 2009

बाह रे गंगा नदी के किनारा

वाह रे गंगा नदी के किनारा
बगल में जेकरे बहत बा पनारा
घाटन पर कुत्तन अउर नाउन के मेला
ग़जब क होले भईया इहां ठेलम ठेला
कोई नहाला तो कोई छिड़कला पानी
भिंजैनीं बइठल दुलरवा के नानी
चिढ़ैंनी अइसे जइसे दूध के उबाला
वाह रे इ गंगा नदी के किनारा
ओह पार मचल बा बड़ा हो हल्ला
लइकन खेलत बायन बैट अउर बल्ला
करारे में निपटने सुक्खू के नन्ना
लेखू के सार चुहत बायन गन्ना
कुल सरवा झगड़ा इहां बिलाला
वाह रे गंगा नदी के किनारा