Thursday, June 11, 2009

सुना है कि दुनिया बदल रही है

सुनाहै कि दुनिया बदल रही है
किस तरह....
चेहरों पर घाव लिए लोग घूमते हैं
किसी भयानक ख्वाब की तरह...
इधर से उधर...
बिलबिलाते, चीखते, चिल्लाते लोग
ज़िंदगी से ठगे गए ज़िंदगी को बचाते लोग
नसें फट रही है...दिल बैठ रहा है
अब तक का समझा, जाना, सब उलट रहा है
सवाल ये कि ये बदलाव हमें किस दिशा में पलट रहा है

3 comments:

  1. अच्छा लिखा है

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  2. जिया रजा बनारसी..........जमवले हउव.........हमहू बनारसी कलन्दर हई..........अउस सब चउचक .......

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  3. gr8, wah raja banaras.

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