शांति शांति शांति दुनिया को इस वक्त जिस मंत्र कि सबसे ज्यादा ज़रूरत है वो यही है। दुनिया आतंकवाद से त्रस्त है। दुनिया की जलवायु हमसे त्रस्त है और हम राजनीति से त्रस्त हैं मंहगाई से त्रस्त हैं और हमारे असल मुद्दों को नज़रअंदाजी़ से त्रस्त हैं। इस बीच दुनिया में तमाम औपचारिकताएं चल रही है, चलती रहेंगी मायने न समझने की कोशिश करें तो बेहतर वर्ना आप एक और मुद्दे से त्रस्त हो सकते हैं। फिर भी दिल है कि मानता नहीं कि तर्ज़ पर तमाम औपचारिकताओं के बारे में सवाल उठते हैं। जैसे की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को मिला शांति का नोबेल। ओबामा को शांति का जो नोबेल मिला है वो सम्मान कभी नेल्सन मंडेला को मिला था, मार्टिन लूथर किंग जूनियर को मिला था, और मदर टेरेसा को मिला था और हां उनको भी मिला था जिनको ताज़ा नोबेल सम्मान से सम्मानित बराक ओबामा साहब ने चीन से बातचीत करने का सुझाव दिया था...ठीक पहचाना आपने हम बात कर रहे हैं तिब्बत की आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे निर्वासित तिब्बति धर्म गुरू दलाई लामा की।
तमाम वो लोग जिनका हमने ज़िक्र किया उनके कामों के बारे में आपको समझाने और हमें बताने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन बराक ओबामा साहब को ये सम्मान उनके किस काम के लिए, शांति के किन प्रयासों के लिए दिया गया इसपर चर्चा गर्म है। चर्चा वहां होती है जहां चर्चा की गुंजाइश होती है तो इसके लिए आप बराक साहब को धन्यवाद दे सकते हैं कि इस पुरस्कार को ग्रहण करने के बाद उन्होने आम लोगों को चर्चा का एक मुद्दा थमा दिया।
वैसे बराक ओबामा शांति की बात करते रहे हैं विश्व में शांति स्थापित हो इसको लेकर उनके बयान अलग अलग मंचों से सुनाई पड़ते हैं। गांधी और मार्टिन लूथर किंग को वो अपना आदर्श मानते हैं। गांधी की तस्वीर को तो वो अपनी जेब रखते हैं। अहिंसा की बात कहते अफगानिस्तान में सैनिकों की संख्या में इज़ाफा करने का फैसला ले लेते हैं। दुनिया के परमाणु संपन्न देशों को ये नसीहत देते हैं कि वो अपने परमाणु हथियारों को खत्म करें ताकि दुनिया में किसी खतरनाक परिस्थिति का निर्माण न हो।
अमेरिका के परमाणु हथियारों को लेकर किसी तरह का संदेह व्यक्त न करें वो शांति की स्थापना के लिए है। वो कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या है उससे निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को कम करें तो ये भी तो शांति की दिशा में एक अहम वक्तव्य है। तो क्या ओबामा को उनके अच्छे वक्तव्य के लिए शांति से भरी बातों के लिए नोबेल मिला है। सवाल पूछने का अधिकार आपको नहीं है। हां आप इस सवाल को मन में बिठाकर त्रस्त हो सकते हैं क्योंकि आप आम आदमी हैं। जहां आप इतने त्रस्त हैं एक मुद्दा और सही।
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यार छोड़ो इन लोगों को। इनका अवार्ड। इनकी शांति। इनका प्रेसिडेंट। इनका मसला। ये अब वो नहीं जो ये हुआ करते थे। वो ज़माना गया तो नहीं। लेकिन वो ज़माना जा रहा है।
ReplyDeletewah sir kya baat kahi hai gr8
ReplyDeleteव्यंग बहुत बढ़िया लिखा है आपने
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